नोएडा एयरपोर्ट-गंगा एक्सप्रेसवे लिंक टेंडर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की L&T की याचिका, UPEIDA के फैसले को ठहराया सही

Page3 Reporter
By Page3 Reporter
3 Min Read

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने नोएडा एयरपोर्ट को बुलंदशहर के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे (पैकेज-1) के टेंडर मामले में L&T की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा कंपनी की तकनीकी बोली (Technical Bid) को खारिज करने का निर्णय बरकरार रहा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने 29 सितंबर को सुनाया। कोर्ट ने UPEIDA के फैसले को पूरी तरह नियमानुकूल मानते हुए मामले में जारी सभी अंतरिम आदेशों को भी समाप्त कर दिया है।

क्या था मुख्य विवाद?

मामले की मुख्य जड़ तकनीकी पात्रता और उसकी समय-सीमा से जुड़ी थी। टेंडर प्रक्रिया के दौरान, UPEIDA ने L&T की तकनीकी बोली को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि बोली जमा करने की अंतिम तिथि (7 सितंबर) को कंपनी पर उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन द्वारा लगाया गया प्रतिबंध प्रभावी था।

हालांकि, L&T पर लगा यह प्रतिबंध बाद में 14 सितंबर को स्थगित कर दिया गया था। L&T की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और जे.एन. माथुर ने पैरवी करते हुए तर्क दिया कि चूंकि प्रतिबंध बाद में स्थगित हो गया था, इसलिए कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।

- Advertisement -
Ad image

न्यायालय का रुख और UPEIDA की दलीलें

UPEIDA की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि किसी भी टेंडर प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पात्रता की शर्तें सभी के लिए समान होनी चाहिए। यदि किसी एक कंपनी को शर्तों में छूट दी जाती है, तो यह अन्य बोलीदाताओं के साथ अन्याय होगा।

हाईकोर्ट ने UPEIDA की इस दलील को स्वीकार किया और स्पष्ट किया कि पात्रता केवल बोली जमा करने की अंतिम तिथि (Cut-off Date) पर ही तय की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि 7 सितंबर को L&T पर प्रतिबंध लागू था, इसलिए 14 सितंबर को मिले स्थगनादेश के आधार पर कंपनी को पिछली तारीख से पात्र नहीं माना जा सकता।

कम कीमत का तर्क भी खारिज

सुनवाई के दौरान L&T की ओर से एक और महत्वपूर्ण दलील दी गई कि उनकी बोली अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लगभग 252 करोड़ रुपये कम थी, जिससे सरकारी खजाने को फायदा होता।

अदालत ने इस वित्तीय तर्क को भी खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल कम कीमत का प्रस्ताव देने से किसी ऐसी कंपनी को टेंडर में शामिल होने का अधिकार नहीं मिल जाता, जो तकनीकी या प्रशासनिक रूप से अपात्र हो। सार्वजनिक निविदाओं में स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन वित्तीय लाभ से ऊपर है।

Share This Article
Follow:
एनसीआर खबर पेज 3 सेक्शन विशेष तौर पर दिल्ली एनसीआर की सोसाइटी में होने वाले इवेंट्स और उससे जुड़े सामाजिक लोगों और सेलिब्रिटीज के बारे में जानकारी देता है। विभिन्न सामाजिक , फैशन, संस्कृति से संबंधित विषयों पर आप हमें अपने लेख ncrkhabarpage3@gmail.com पर भी भेज सकते है I पेज 3 पर किसी भी तरह के इवेंट, के प्रायोजित लाइव प्रसारण और कवरेज के लिए आप हमें 9319674938 पर संपर्क कर सकते हैं I
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *