ग्रेटर नोएडा, 8 अगस्त 2026। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा और तकनीक का समन्वय अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। इसी विजन को रेखांकित करते हुए मेट्रो यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में “Unlock the Power of Artificial Intelligence in Education” विषय पर एक विशेष AI सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की शिक्षा का खाका ‘इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी’ के बिना अधूरा है।
पारंपरिक शिक्षा से आगे
नई सोच की जरूरत सेमीनार को संबोधित करते हुए मेट्रो यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राजेश पाठक ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने तर्क दिया कि आज के प्रतिस्पर्धी और औद्योगिक परिवेश में पुरानी और पारंपरिक शिक्षा पद्धतियां अपनी प्रासंगिकता खो रही हैं। डॉ. पाठक के अनुसार, “आज के विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान की नहीं, बल्कि ‘इन्टर-डिसिप्लिनरी थिंकिंग’ और ‘एथिकल लीडरशिप’ की आवश्यकता है।” उनके इस विचार ने सेमिनार में उपस्थित प्रधानाचार्यों और शिक्षाविदों के बीच एक सार्थक बहस को जन्म दिया कि कैसे AI को एक शिक्षक के ‘प्रतिस्थापन’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘शक्तिशाली सहयोगी’ के रूप में देखा जाना चाहिए।
उद्योग-अकादमिक तालमेल
एक गेम-चेंजर पहल सेमिनार में मेट्रो यूनिवर्सिटी द्वारा शिक्षा को उद्योग-केंद्रित (Industry-oriented) बनाने की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों पर भी चर्चा हुई। डॉ. पाठक ने IIT मंडी के सहयोग से शुरू किए गए 94-क्रेडिट MBA कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसे NorthBridge Minds और यूनिवर्सिटी ने संयुक्त रूप से डिजाइन किया है। यह कार्यक्रम इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एकेडेमिया और इंडस्ट्री एक साथ मिलकर भविष्य के कॉर्पोरेट लीडर्स तैयार कर सकते हैं। AI-पावर्ड लर्निंग और बिजनेस सिमुलेशन जैसी सुविधाएं इस कोर्स को पारंपरिक मैनेजमेंट डिग्री से कहीं अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाती हैं।
एक मजबूत विरासत का विस्तार
मेट्रो यूनिवर्सिटी का विकास केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि एक विजनरी हब के रूप में हो रहा है। डॉ. (प्रो.) पुरुषोत्तम लाल जी की दूरदर्शी सोच का उल्लेख करते हुए डॉ. पाठक ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार ‘क्लिनिकल एक्सीलेंस’ को उन्होंने समाज की सेवा का माध्यम बनाया, अब विश्वविद्यालय उसी प्रतिबद्धता को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ा रहा है। यूनिवर्सिटी अब फाउंडेशनल साइंसेज, मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के बीच एक ‘डायनामिक इकोसिस्टम’ तैयार कर रही है, जहाँ शोध और वैश्विक सहयोग सर्वोपरि हैं।
तकनीकी विशेषज्ञता और भविष्य का रोडमैप
कार्यक्रम के दौरान AI विशेषज्ञों ने व्यावहारिक अनुप्रयोगों के माध्यम से दिखाया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कक्षा के अनुभव को व्यक्तिगत और प्रभावी बना सकता है। इंजीनियरिंग विभाग के डीन डॉ. दिलकेश्वर पांडेय ने तकनीकी शिक्षा में AI की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक विद्यार्थियों को न केवल समस्या सुलझाने में मदद करेगी, बल्कि उनमें ‘इनोवेशन’ की भूख भी जगाएगी।
एडमिशन डायरेक्टर और हेड-एडमिशन ने भी प्रधानाचार्यों के साथ सीधा संवाद किया, जहाँ उन्होंने बदलते करियर विकल्पों और भविष्य के उन हाई-टेक प्रोग्राम्स के बारे में जानकारी दी, जो आने वाले समय में रोजगार की गारंटी बन सकते हैं।
