धनबाद: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए अपने संयुक्त प्रयासों को तेज कर दिया है। इसके तहत कोयले के रिसाव को रोकने, अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाने और कोयला चोरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को कड़ा करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में बीसीसीएल के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई है।
हाल ही में 17 सितंबर को धनबाद स्थित कोयला भवन में सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन और बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल के बीच एक उच्चस्तरीय और विस्तृत बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत सरकार की ‘शून्य कोयला रिसाव नीति’ (Zero Coal Leakage Policy) का प्रभावी कार्यान्वयन और राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में कोयले का संरक्षण था।
कानूनी शिकंजे और अभियोजन पर जोर
बैठक के दौरान केवल भौतिक सुरक्षा तक ही सीमित न रहकर, कानूनी प्रवर्तन और अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने मामलों की नियमित निगरानी, जांच और जब्ती की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए।
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम के तहत पंजीकृत मामलों और अभियोजन की वर्तमान स्थिति की भी बारीकी से समीक्षा की गई, जिसमें लंबित मामलों पर समयबद्ध कार्रवाई करने की बात कही गई। प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए अनुभवी वकीलों की नियुक्ति, एक समर्पित कानूनी अधिकारी के जरिए मामलों की निगरानी और दस्तावेजों के व्यवस्थित रखरखाव पर भी चर्चा हुई।
नए प्रस्तावों पर विचार सुरक्षा तंत्र को और अधिक कानूनी मजबूती देने के लिए बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें सीआईएसएफ के निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों को धारा 23बी को छोड़कर एमएमडीआर अधिनियम के तहत कुछ विशेष शक्तियां प्रदान करने की संभावना शामिल है। इसके अलावा, धनबाद स्थित सीबीआई न्यायालय को एमएमडीआर मामलों के लिए एक ‘नामित न्यायालय’ के रूप में अधिसूचित करने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया।
आपसी समन्वय और भविष्य की रणनीति बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि बीसीसीएल, सीआईएसएफ और स्थानीय राज्य एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय होना बेहद जरूरी है। नियमित निगरानी और समय पर की गई कार्रवाई से ही खनन क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जा सकता है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में सीआईएसएफ और बीसीसीएल के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें एडीजी (उत्तर) बिनिता ठाकुर, आईजी सीआईएसएफ (पूर्वी सेक्टर) प्रबोध चंद्र, आईजी सीआईएसएफ (उत्तर-पूर्वी सेक्टर) एसके मोहनका, बीसीसीएल के निदेशक (वित्त/मानव संसाधन) राजेश कुमार, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) राजीव कुमार सिन्हा, सीआईएल के कार्यकारी निदेशक (उत्पादन) आनंद, डीआईजी सीआईएसएफ (बीसीसीएल यूनिट) राजीव मिश्रा और सुरक्षा सलाहकार विपुल शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

