नई दिल्ली: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं और स्थानीय निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की खबर है। रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी सुभाष चंद्र लाल दास को दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। जस्टिस उमेश कुमार के सेवानिवृत्त (रिटायर) होने के बाद से यह पद खाली चल रहा था, जिससे आयोग के कई नीतिगत फैसलों में देरी हो रही थी। अब इस नई नियुक्ति से आयोग के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।
पूर्ण हुआ DERC का बोर्ड चेयरपर्सन के अलावा, आयोग को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज अजय कुमार जैन को मेंबर (लीगल) नियुक्त किया गया है, जो कानूनी मामलों की देखरेख करेंगे। वहीं, प्रवीण गुप्ता को मेंबर (नॉन-लीगल) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के बाद अब DERC का बोर्ड पूरी तरह से गठित हो गया है।
स्थानीय निवासियों और बिजनेस सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह फैसला? दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) का काम दिल्ली में बिजली की दरों (टैरिफ) को निर्धारित करना, बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के कामकाज की निगरानी करना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारिक संगठनों के लिए ये नियुक्तियां बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आगामी महीनों में बिजली दरों के निर्धारण और बिजली आपूर्ति से जुड़ी गाइडलाइंस पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने हैं। नए बोर्ड के गठन से बिजली बिलों से जुड़े विवादों का निपटारा और नई योजनाओं को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया तेज होगी।
नए चेयरपर्सन सुभाष चंद्र लाल दास के प्रशासनिक अनुभव और नए सदस्यों की कानूनी व तकनीकी विशेषज्ञता से दिल्ली के पावर सेक्टर को एक संतुलित और मजबूत दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

