मनोज कुमार शर्मा ने आज देश की प्रतिष्ठित महारत्न पब्लिक सेक्टर कंपनी, GAIL (इंडिया) लिमिटेड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। ऑयल, गैस और हाइड्रोकार्बन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तीन दशकों से अधिक का शानदार अनुभव रखने वाले शर्मा का इस पद पर आना केवल एक कॉर्पोरेट नियुक्ति नहीं है, बल्कि देश के बुनियादी ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ईंधन की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
आम उपभोक्ताओं के लिए क्यों खास है यह नियुक्ति?
प्रोजेक्ट्स डायरेक्टर के रूप में मनोज कुमार शर्मा की भूमिका सीधे तौर पर आम जनता के जीवन को प्रभावित करने वाली है। गेल से पहले, वे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में ईस्टर्न रीजन पाइपलाइन्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और रीजनल हेड के रूप में काम कर रहे थे। वहां उन्होंने पांच राज्यों में 5,700 किलोमीटर से अधिक के विशाल पाइपलाइन नेटवर्क की देखरेख की और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) गतिविधियों का सफल नेतृत्व किया।
स्थानीय निवासियों के नजरिए से देखें तो सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का काम सीधे हमारी रसोई और गाड़ियों से जुड़ा है। शर्मा का यह व्यापक अनुभव अब गेल के माध्यम से हमारे घरों तक पहुंचने वाली पीएनजी (PNG) और वाहनों के लिए सीएनजी (CNG) के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा। इसका सीधा नतीजा यह होगा कि आने वाले समय में आम लोगों को एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग के झंझट से मुक्ति मिलेगी और उनके घरों तक सुरक्षित, सस्ती और पाइप वाली प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
तकनीकी अनुभव और समय पर परियोजनाओं को पूरा करने की क्षमता
शर्मा के पास दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित XIMB से बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा है। उनके इस बेहतरीन शैक्षणिक और व्यावहारिक अनुभव का लाभ अब गेल को मिलेगा। उनके पास बड़े ऑयल, एलपीजी (LPG) और नेचुरल गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स की इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट का गहरा अनुभव है।
अक्सर देखा जाता है कि बड़ी ढांचागत परियोजनाओं में देरी के कारण न केवल सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है, बल्कि स्थानीय जनता को भी लंबे समय तक सड़क खुदाई, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन शर्मा जैसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के विशेषज्ञ के नेतृत्व में, यह उम्मीद की जा सकती है कि गेल के आगामी प्रोजेक्ट्स न केवल समय पर पूरे होंगे, बल्कि सुरक्षा के उच्चतम मानकों का भी पालन किया जाएगा। समय पर प्रोजेक्ट पूरे होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा होंगे।
लंबा और स्थिर कार्यकाल: विकास को निरंतरता मिलने की पूरी उम्मीद
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के नामांकन और गेल के बोर्ड की मंजूरी के बाद, मनोज कुमार शर्मा का कार्यकाल 30 अप्रैल, 2031 (उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख) तक रहेगा। लगभग पांच साल का यह लंबा और स्थिर कार्यकाल कंपनी के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा। इतने लंबे समय तक एक ही अनुभवी नेतृत्व होने से परियोजनाओं की योजना और उनके क्रियान्वयन में निरंतरता बनी रहेगी, जिससे नीतियां बीच में नहीं अटकेंगी।

