नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) के गुरुग्राम स्थित सोलर सेल प्लांट से लगभग 71 लाख रुपये मूल्य की 31.65 किलोग्राम चांदी गायब होने का मामला सामने आया है। इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली है।
यह संयंत्र बीएचईएल की सौर प्रौद्योगिकी से जुड़ी अनुसंधान और विकास गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है, जहां फोटोवोल्टिक (PV) सेल के निर्माण के लिए चांदी का उपयोग किया जाता है।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2024 को गुरुग्राम संयंत्र के ‘एमोर्फस सिलिकॉन सोलर सेल प्लांट’ में भौतिक स्टॉक (Physical Stock) की जांच की गई थी। इस दौरान गोदरेज की एक तिजोरी की जांच करने पर अधिकारियों को केवल 6.23 किलोग्राम चांदी ही मिली, जिसमें 3.98 किलोग्राम लक्ष्य (Target) चांदी और 2.25 किलोग्राम स्क्रैप शामिल था।
स्टॉक के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2016-17 से लेकर 2020 तक ऑडिट और कंपनी के दस्तावेजों में 35.6 किलोग्राम चांदी का भंडार और पुनर्चक्रण योग्य चांदी (जिसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय यानी MNRE द्वारा वित्तपोषित संपत्तियों से जोड़ा गया था) दर्ज की जाती रही है। रिकॉर्ड में दर्ज इस मात्रा और वर्तमान में मिले स्टॉक के बीच 31.65 किलोग्राम चांदी का अंतर पाया गया, जिसका कोई हिसाब नहीं मिल सका।
सीबीआई की जांच और एफआईआर में नाम प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने इस मामले में प्रथम दृष्टया सबूत पाते हुए दो मुख्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है:
डॉ. भरत कुमार पंत — अतिरिक्त महाप्रबंधक और गुरुग्राम संयंत्र के प्रमुख (जो वर्तमान में भी इसी पद पर कार्यरत हैं)।
आशीष कुमार — तत्कालीन प्रबंधक और सामग्री प्रबंधन प्रभारी (जो अब BHEL के दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय में तैनात हैं)।
इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसी ने तीन अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं:
अजय यादव — तत्कालीन वित्त एवं मानव संसाधन प्रबंधक (वर्तमान में नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में संयुक्त महाप्रबंधक – वित्त)।
विनयन भारद्वाज और अजय कुमार (दोनों वर्तमान में BHEL के दिल्ली कॉर्पोरेट कार्यालय में कार्यरत हैं)।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
आईपीसी की धारा 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र)
आईपीसी की धारा 201 (सबूतों को गायब करना)
आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवकों द्वारा आपराधिक विश्वासघात)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13
मामला सार्वजनिक होने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार BHEL, नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और डॉ. भरत कुमार पंत की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या टिप्पणी नहीं दी गई है। इस घटना ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में इन्वेंट्री प्रबंधन और आंतरिक लेखा परीक्षा प्रणालियों की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

