आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर ‘इनवेस्टमेंट हब’ के रूप में अपनी पहचान बना चुके ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ समय में प्रशासनिक गतिशीलता में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जुलाई 2023 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का पद संभालने वाले 2004 बैच के आईएएस अधिकारी रवि कुमार एनजी (NG Ravi Kumar) ने अपनी कार्यशैली से शहर के विकास को एक नई दिशा दी है।
प्रशासनिक अनुभव का मिलन, सख्त तेवर और जन-केंद्रित दृष्टिकोण
3 मई 1977 को जन्मे रवि कुमार एनजी ने जब से बागडोर संभाली है, तब से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में ‘सक्रियता’ (proactiveness) स्पष्ट दिखाई देती है। पर्यटन महानिदेशक और गोरखपुर के संभागीय आयुक्त जैसे पदों पर रहने के बाद, उनका अनुभव अब ग्रेटर नोएडा की चुनौतियों को सुलझाने में काम आ रहा है। वे केवल फाइलों तक सीमित रहने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे उन चुनिंदा नौकरशाहों में से हैं जिन्हें जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील और समाधान-उन्मुख माना जाता है। जहां एक ओर वे निवेशकों के लिए सुलभ हैं, वहीं अवैध अतिक्रमण के खिलाफ उनके तेवर बेहद सख्त रहे हैं। सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं से मुक्त कराने के लिए उन्होंने विशेष अभियान चलाए हैं। सार्वजानिक तोर पर कैमरे और प्रचार से दूर रहना उन्हें अन्य अधिकारियो से अलग बनाती है है जहाँ अन्य अधिकारी प्रचार के लिए गलियों सडको पर सार्वजानिक भ्रमण करते दीखते हैं वो जनता की परेशानियों को परदे के पीछे अकेले जाकर देखते हैं I उनका स्पस्ट मानना है कि प्रतिदिन लोगो से मिलने के लिये कार्यालय में उनके उबलब्ध होने से नीचे के अधिकारी भी सही कार्य करते हैं I
एक वित्तीय मास्टरक्लास: घाटे से मुनाफे की ओर
रवि कुमार एनजी के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को कर्ज के दलदल से बाहर निकालना रही है। 1 अप्रैल 2023 को प्राधिकरण पर निजी बैंकों का लगभग 1032.89 करोड़ रुपये का कर्ज था। आज स्थिति यह है कि प्राधिकरण निजी बैंकों के कर्ज से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। यही नहीं, नोएडा प्राधिकरण के 2590 करोड़ रुपये के पुराने बकाया को भी योजनाबद्ध तरीके से चुकाया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का है। जुलाई 2023 में जहां प्राधिकरण के पास महज 357.75 करोड़ रुपये की एफडी थी, वह अब 17 गुना से भी ज्यादा बढ़कर 6154.25 करोड़ रुपये हो गई है। इस वित्तीय अनुशासन का परिणाम यह है कि प्राधिकरण को अब केवल ब्याज से ही सालाना 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। एक पेशेवर के नजरिए से देखा जाए, तो यह ‘राजकोषीय प्रबंधन’ का एक अनुकरणीय उदाहरण है।
औद्योगिक विकास और उद्यमियों का भरोसा
रवि कुमार एनजी ने सत्ता संभालते ही ‘उद्योग बंधु’ की बैठकों को एक नई ऊर्जा दी है। उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उन्होंने मासिक बैठकों का जो तंत्र विकसित किया है, उसने निवेशकों के बीच ग्रेटर नोएडा के प्रति विश्वास बहाल किया है। उनका लक्ष्य स्पष्ट है: ग्रेटर नोएडा को केवल एक आवासीय शहर नहीं, बल्कि वर्ल्ड-क्लास औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करना। जेवर एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक हब को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़कों को उनकी मंजूरी देना, इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
जन-केंद्रित सुधार
किसानों से लेकर फ्लैट खरीदारों तक एक प्रशासक के रूप में उनकी सबसे बड़ी खूबी ‘संतुलित दृष्टिकोण’ है। वे एक ओर जहां औद्योगिक विकास के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांवों के बुनियादी ढांचे—जैसे जल निकासी, सीवर लाइन और सड़कों का सुदृढ़ीकरण—उनकी प्राथमिकता सूची में है। इसके अलावा, फ्लैट खरीदारों के लिए ओटीएस (OTS) योजना के जरिए विलंब शुल्क में राहत देकर उन्होंने उन लाखों निवासियों को बड़ी राहत दी है, जो वर्षों से प्राधिकरण के चक्कर काट रहे थे।
भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’
रवि कुमार एनजी की छवि एक शांत लेकिन सख्त अधिकारी की है। भ्रष्टाचार के प्रति उनके ‘जीरो टॉलरेंस’ के रुख ने प्राधिकरण के भीतर एक अनुशासित कार्य संस्कृति पैदा की है। उनकी प्रशासनिक सुधारों की पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व दृढ़ हो, तो सरकारी मशीनरी भी परिणाम देने में पीछे नहीं रहती।
ग्रेटर नोएडा आज योगी आदित्यनाथ के ‘स्मार्ट सिटी’ विजन के अनुरूप एक बड़े कायाकल्प के दौर से गुजर रहा है। रवि कुमार एनजी का यह प्रशासनिक ‘मॉडल’ न केवल समयबद्ध परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर देता है, बल्कि समावेशी विकास (Inclusive Development) की नींव भी रखता है। यदि यह गति बनी रहती है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा देश के सबसे संगठित और संपन्न औद्योगिक शहरों में शीर्ष पर होगा।
एक अनुभवी और जन-केंद्रित अधिकारी के रूप में, रवि कुमार एनजी का कार्यकाल आने वाली पीढ़ी के नौकरशाहों के लिए एक केस स्टडी की तरह है, जहाँ तकनीक, पारदर्शिता और जनता का हित ही विकास का असली आधार है।
