गौड़ सिटी‑2, ग्रेटर नोएडा Page3 – ग्रेटर नोएडा‑वेस्ट स्थित 11 एवेन्यू सोसाइटी में इस साल के वसंतोत्सव का मुख्य आकर्षण माँ नंदा‑सुंदा देवी की ढोली यात्रा रही। इस पारम्परिक यात्रा में स्थानीय महिला सवारियों ने पहाड़ी‑प्रभावी वेशभूषा, पगड़ी‑गली, कढ़ाईदार झालर और रंग‑बिरंगी सड़ियों के साथ पवित्र देवी‑देवताओं को सम्मानित किया।
उत्सव के मंच पर उत्तराखंड की झाँकी पेश की गई। छोलिया नृत्य, जो शत्रु के सामना में बहादुर सैनिकों के कदमों से उत्पन्न हुआ, दर्शकों को अपने तेज़ ताल‑बद्ध ध्वनि‑परम्परा से प्रभावित किया। ड्रम‑बाजियों ने धोल‑दमाऊ की थाप पर ताल‑बद्ध साज‑सुर लहराया, जबकि लोकगीतकारों ने ‘केसरिया कण्ठा’, ‘झोला’ और ‘बुशर’ जैसी धुनों के माध्यम से पहाड़ी जीवन की कहानियों को बयाँ किया।
उत्सव में 150 से अधिक बच्चों ने समूह में उत्तराखंडीय लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। छोटे‑छोटी आवाज़ें, सादे कोरस और ताल‑बद्ध नृत्य ने मंच को जीवंत बना दिया। बच्चों की इस भागीदारी को आयोजक समिति के संस्थापक आशीष बिष्ट, कविता पांडे और आरुषी जुयाल ने सराहा, जिन्होंने बताया कि यह पहल प्रवासियों के बच्चों को अपनी जड़ें याद दिलाने और संस्कृति को आगे ले जाने का अवसर है।
उत्सव के दौरान उत्तराखंड की पारम्परिक व्यंजनों का भी आयोजन किया गया। “खीर, आलू मटर की सब्ज़ी, ढोकला, बटर चाय और बांस की फुहार” जैसी विशेषताओं को स्थानीय निवासियों ने बड़ी चाव से चखा। आयोजकों का कहना है कि भोजन के माध्यम से भी सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत किया गया।
दिल्ली विधानसभा के सदस्य रवि नेगी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “ऐसे कार्यक्रम प्रवासियों की जन्मभूमि के प्रति गहरी लगन को दर्शाते हैं। जब हम अपने बच्चों को अपनी भाषा, संगीत और पाक‑परम्पराओं से परिचित कराते हैं, तो वह न केवल अपने इतिहास से जुड़ते हैं, बल्कि हमारे सामाजिक बंधनों को भी सुदृढ़ बनाते हैं।”
स्थानीय निवासियों ने भी कार्यक्रम की सराहना की, कई माताओं ने बताया कि उनके बच्चों ने इस उत्सव के बाद उत्तराखंड की संस्कृति को लेकर अधिक उत्साह दिखाया।

