नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत-एआई इम्पैक्ट समिट में, गौतम बुद्ध नगर स्थित जिम्स (गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) ने अपने अभिनव योगदान से ध्यान आकर्षित किया। जिम्स ने न केवल तीन प्रभावशाली पैनलों की मेजबानी की, बल्कि उत्तर प्रदेश के पहले सरकारी मेडिकल इन्क्यूबेटर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलतापूर्वक पेश किया, जो भारत में अपनी तरह का एक अनूठा मॉडल है।
जिम्स के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (सीएमआई) द्वारा संचालित यह इन्क्यूबेटर, एक सरकारी सेक्शन-8 कंपनी के रूप में एक कार्यरत सार्वजनिक अस्पताल के भीतर स्थापित किया गया है। यह मॉडल भारत में पहली बार सरकारी अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और हेल्थकेयर नवाचार को एकीकृत करता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में तकनीकी क्रांति लाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
समिट में फ्रांस के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों, सौदं तेनचे-एक्सेल और गौटियर क्लिक्स ने भाग लिया और जिम्स के इस सरकारी अस्पताल-आधारित इनोवेशन मॉडल की सराहना की। भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष के दौरान यह अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति, भारत के नवाचार प्रयासों की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।
जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि सार्वजनिक अस्पताल अब केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्वयं नवाचार के प्रबल निर्माता बनने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “फ्रांसीसी नेतृत्व की उपस्थिति और हमारे मॉडल की सराहना यह दर्शाती है कि भारत के सरकारी संस्थान वैश्विक स्तर पर नैतिक और सुरक्षित एआई का नेतृत्व कर सकते हैं।” यह दृष्टिकोण छात्रों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवा में नवाचार लाना चाहते हैं।
यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश और भारत के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा संस्थान भी अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। जिम्स का यह मॉडल मेडिकल छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरणा है, जो उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एआई संचालित समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

